CM presides over All Party meeting to review arrangements for proposed visit of President of India
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Hindi Diwas celebrated at Shoolini Univ
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सेरडगोन के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर-विभाग नहीं ले रहा सुध
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हिंदी विश्वभाषा बन सकती है इसके लिए हमारी वचनबद्धता अनिवार्य है- प्रोफेसर चमन लाल गुप्त
शिमला- भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में आज 14 सितंबर को हिंदी दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है जिसमें कोविड नियमों का विशेष ख्याल रखा जाएगा। यह समारोह संस्थान के मुख्य संगोष्ठी कक्ष में आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्थान के उपाध्यक्ष एवं कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर चमन लाल गुप्त ने जो स्वयं हिंदी के जानेमाने विद्वान हैं। समारोह का आरंभ तान्या, अक्षय और संयम द्वारा प्रस्तुत देश भक्ति पर आधारित कविताओं तथा हिंदी के महत्व पर प्रस्तुति से हुआ। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर गुप्त ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी विश्वभाषा बन सकती है इसके लिए हमारी वचनबद्धता अनिवार्य है। साथ ही हमें भाषाई बहुलता स्थापित करने के लिए अन्य भाषाओं का भी सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने सबसे पहले हमारी भाषा नीति और ज्ञान परंपराओं पर प्रहार किया मगर अब देश की नई शिक्षा नीति राष्ट्रवाद की ओर बढ़ रही है। वक्ताओं के क्रम में संस्थान के अध्येता डाॅ. बलराम शुक्ल ने कहा कि हिन्दी ने अपनी भूमिका का ठीक-ठाक निर्वहन किया है। जहां एक ओर हिन्दी दिवस पर हिन्दी की महिमा का गुणगान अवश्य है वहीं भाषाई समानमूलकता भी अनिवार्य है। अतिथि अध्येता प्रोफेसर डी.पी. सकलानी ने हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिलाने की पैरोकारी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की थी और उनके योेगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। हिन्दी को लोकभाषा बनाने के लिए उन्होंने लोक सुलभ शब्दों के अपनाए जाने पर बल दिया। हिन्दी के जानेमाने विद्वान प्रोफेसर माधव सिंह हाड़ा ने कहा कि जार्ज गियर्सन द्वारा किया गया हिन्दी साहित्य काल विभाजन औपनिवेशिक था जो अभी भी हमारे मन और मस्तिष्क पटल पर विद्यमान है, उसे बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने टीवी चैनलों में बढ़ती हिन्दी की स्वीकार्यता पर प्रसन्नता भी जाहिर की और हिन्दी साहित्य में हुए लेखन को अन्य भाषाओं में अनूदित किए जाने पर अपना पक्ष रखा। संस्थान की आवासी चिकित्सा अधिकारी डाॅ. मीनू अग्रवाल ने ’चिकित्सा विज्ञान तथा हिंदी’ विषय पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा अन्य विधाओं की तरह चिकित्सा विज्ञान में आम बोलचाल में प्रयुक्त होने वाले शब्दों का आसानी से स्वीकारा जाता है। अनुभाग अधिकारी आपूर्ति एवं सेवा श्रीमती विजय लक्ष्मी भारद्वाज तथा दीपक शर्मा ने भी हिन्दी की दशा-दिशा पर अपने विचार रखे। अध्येता डाॅ. अल्का त्यागी तथा देवेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर अपनी-अपनी कविताएं पढ़ीं। संस्थान के कार्यवाहक सचिव श्री प्रेम चंद, ने उपस्थित सभी सभासदों का धन्यवाद ज्ञापति किया और संस्थान द्वारा प्रकाशित दो हिन्दी पत्रिकाओं- हिमांजलि तथा चेतना को यूजीसी केयर लिस्ट में शामिल किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा शीघ्र ही एक अन्य हिन्दी पत्रिका का प्रकाशन आरंभ करने पर विचार किया जाएगा जिसमें केवल संस्थान के अधिकारियों तथा कर्मचारियांे की रचनाएं प्रकाशित की जाएंगी। साथ ही उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अधिक-अधिक कामकाज हिंदी में करने का अपील की। सेल्ज़ एवं जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की प्रेषित हिंदी दिवस के अवसर संदेश पढ़कर सुनाया। मंच का संचालन हिंदी अनुवादक राजेश कुमार ने किया। संस्थान में 29 सितंबर तक हिंदी पखवाड़ा भी मनाया जा रहा है, जिसके दौरान राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार तथा अधिकारियों/कर्मचारियों में हिन्दी में कामकाज के प्रति विशेष रूचि पैदा करने के लिए हिन्दी निबंध, कविता पाठ, अनुवाद व शब्द ज्ञान, टंकण आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
Himachal Pradesh National Law University, Shimla organises a special event on “Hindi Diwas”
The Himachal Pradesh National Law University, Shimla organized a special event on…
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