औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण

डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वन उत्पाद विभाग द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें शिमला जिला के 20 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस प्रक्षीक्षण का आयोजन हिमाचल प्रदेश कौशल विकास योजना के अंतर्गत किया गया।

वन उत्पाद विभाग के हैड डॉ मीनू सूद ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की सही पहचान तथा उनका रख रखाव, खेती, कटाई का समय, प्रसंस्करण एवं मूल्य वर्धन पर जानकारी उपलब्ध करवाना था। इसके अतिरिक्त सुगंधित पौधों से सुगंधित तेल निकालने की विधि एवं उनके औषधीय महत्व, एवं औषधीय पौधों से रासायनिक तत्व निकालने की विधि, हर्बल चाय बनाना, हर्बल सैनिटाइजर बनाना तथा खाने के तेल को भी निकालने की विधि को प्रयोगशाला में सिखाया गया। इसके अलावा किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर आधारित उद्योगों का भी भ्रमण करवाया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग जैसे फल, सब्जी, फूल, मशरूम में क्या-क्या कार्य हो रहे है, उनके बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई गई। किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के साथ-साथ अन्य पौधों में पाई जाने वाले कीट एवं उनके रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम के समापन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होनें सभी प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वह औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को प्राकृतिक विधि से करें। प्रोफेसर चंदेल ने सभी से एक समूह के तौर पर औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को आगे बढ़ाने और इसका मूल्य संवर्धन करने का आग्रह किया। उन्होंने सभी से विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित कृषि ऊष्मायन केंद्र में आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर अपने प्रॉडक्ट का विकास करके रोजगार प्रदाता बनने का आग्रह किया।

इस अवसर पर डॉ अंजू धीमान, औदयानिकी महाविद्यालय की डीन और विवि में कौशल विकास योजना के तहत की जा रहे प्रशिक्षण के समन्वयक ने इस कार्यक्रम के तहत हो रही सभी गतिविधियों के बारे में बताया।

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