शिमला, 23 अगस्त। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ढली डिपो, शिमला द्वारा जुन्गा तहसील के गांव पीरन के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू कर दी गई है। क्षेत्रवासियों ने इस नई बस सेवा का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
बस सेवा के चालक मदन एवं परिचालक हरिपाल चौहान के अनुसार इलेक्ट्रिक बस शुरू होने से यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुविधाजनक और शांतिपूर्ण सफर मिलेगा। इसके साथ ही डीजल वाहनों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण से भी काफी हद तक निजात मिलेगी। इलेक्ट्रिक बसों से वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण कम होता है तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
परिचालक हरिपाल ने बताया कि ढली शिमला से वाया जुन्गा पीरन आने-जाने में पहले डीजल पर करीब 4,000 रुपये प्रतिदिन खर्च होते थे। इलेक्ट्रिक बस के संचालन से अब बैटरी चार्ज करने में आने-जाने का बिजली खर्च करीब 1,200 रुपये रह गया है। इससे परिवहन निगम को प्रतिदिन ईंधन खर्च में लगभग 2,800 रुपये की बचत होगी। इस प्रकार इलेक्ट्रिक बस सेवा लंबे समय में परिवहन निगम के परिचालन खर्च को कम करने में भी सहायक साबित हो सकती है। उन्होने बताया कि करीब 150 किलोमीटर सफर में 65 प्रतिशत बेटरी खर्च होती है ।
इनका कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इनमें इंजन का शोर कम होने के कारण यात्रियों को अपेक्षाकृत शांत और सुखद यात्रा का अनुभव मिलता है। साथ ही, डीजल और पेट्रोल पर निर्भरता कम होने से जीवाश्म ईंधन की खपत घटती है। इससे सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
चालक ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति कई स्थानों पर खराब है और सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण बस के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में सड़कों की मरम्मत करवाना भी जरूरी है, ताकि इलेक्ट्रिक बस सेवा का सुचारू एवं सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके। देखना यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों की गडडों व टूटी फूटी सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसे कितनी कामयाब होती है ।











