एचपी-शिवा परियोजना की उपलब्धियां केवल सरकारी रिपोर्टों तक सीमित न रहें-डॉ0 सी पालरासू
शिमला 18 अगस्त । हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी-शिवा परियोजना को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने और इसका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए बागवानी विभाग ने फील्ड गतिविधियां तेज कर दी हैं। परियोजना टीम किसानों के खेतों में पहुंचकर पौधारोपण सहित विभिन्न कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी कर रही है।
सचिव बागवानी डॉ0. सी0 पॉल रासु ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकार की बागवानी योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम किसान तक पहुंचे। एचपी-शिवा परियोजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में जाकर किसानों के साथ कार्य करने को कहा गया है।
सचिव बागवानी ने बताया कि एचपी-शिवा परियोजना की उपलब्धियां केवल सरकारी रिपोर्टों तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों के खेतों और उनकी बढ़ती आय में स्पष्ट रूप से दिखाई दें। परियोजना के तहत लगाए जा रहे पौधे भविष्य की आय, ग्रामीण रोजगार और टिकाऊ बागवानी की मजबूत नींव बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
परियोजना निदेशक डॉ. समीर सिंह राणा ने बताया कि विभाग की टीम लगातार फील्ड में सक्रिय और वह स्वयं पिछले तीन दिनों से जिला कांगड़ा और बिलासपुर के विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं पहुंचकर परियोजना के तहत चल रहे पौधारोपण कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान खेतों में पौध सामग्री की गुणवत्ता, पौधों की निर्धारित दूरी, भूमि की तैयारी, वैज्ञानिक लेआउट और सिंचाई जैसी व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है।
गौर रहे कि परियोजना निदेशक किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुन रहे हैं तथा मौके पर आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया जा रहा है। टीम का विशेष जोर गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के उपयोग और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पौधारोपण सुनिश्चित करने पर है, ताकि भविष्य में बगीचों की उत्पादकता प्रभावित न हो।
उन्होने बताया कि एचपी-शिवा परियोजना का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी फल बगीचे विकसित कर किसानों की आय बढ़ाना है। इसके तहत पारंपरिक खेती पर निर्भर किसानों को फल आधारित एवं विविधीकृत बागवानी की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले समय में वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, सिंचाई, पौध संरक्षण, उत्पादन एवं गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण तथा बेहतर बाजार संपर्क पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डॉ0 समीर राणा ने बताया कि विभागीय अधिकारियों की फील्ड में मौजूदगी से किसानों में विश्वास बढ़ रहा है और उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान सीधे संबंधित अधिकारियों के साथ संवाद करके मिल रहा है। इससे परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ किसानों की भागीदारी भी मजबूत हो रही है।











