भरांडी में बछड़े की टूटी टांग में लगाई रॉड
शिमला, 23 अगस्त। जुन्गा तहसील की ग्राम पंचायत सतलाई के वार्ड जुग्गर में पशुपालन विभाग की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम ने एक 11 वर्षीय जरसी गाय की आंख का सफल ऑपरेशन कर बेजुबान गौवंश को नई जिंदगी दी। इसके अलावा टीम ने भरांडी गांव में एक बछड़े की टूटी टांग का भी सफल ऑपरेशन कर उसमें रॉड लगाकर उसे दोबारा चलने योग्य बनाया।
जुग्गर निवासी सुशील कुमार ने बताया कि उनकी 11 वर्ष की जरसी गाय की एक आंख में पिछले करीब तीन वर्षों से लालिमा और अन्य समस्या बनी हुई थी। करीब 12 किलोग्राम प्रतिदिन दूध देने वाली यह गाय परिवार की आय का एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त साधन है।
उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों में गाय की आंख के बाहर मांस का असामान्य रूप से बढ़ना शुरू हो गया, जिसके कारण गाय को दिखाई देना भी बंद हो गया था। उन्होंने पशुपालन विभाग कोटी के डॉ. जयपाल बास्टा से संपर्क किया। जांच के दौरान गाय की आंख में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा नामक बीमारी की पुष्टि हुई।
डॉ. जयपाल बास्टा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉलीक्लिनिक रामपुर के सर्जन एवं पशु नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अक्षय कुमार को विशेष रूप से जुग्गर बुलाया। कोटी अस्पताल की टीम के साथ चिकित्सकों ने मौके पर पहुंचकर करीब तीन घंटे की कड़ी मेहनत के बाद गाय की आंख का सफल ऑपरेशन किया।
इसके बाद टीम ने भरांडी गांव के निवासी हीरा सिंह के घर पहुंचकर रात्रि को टार्च के उजाले में एक बछड़े की टूटी हुई टांग का भी ऑपरेशन किया। हीरा सिंह ने बताया कि बछड़े की टांग पूरी तरह टूट गई थी, लेकिन पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर उपचार करते हुए टांग में रॉड लगाई। उपचार के बाद बछड़ा अब धीरे-धीरे चलने योग्य हो गया है।
सुशील कुमार और हीरा सिंह ने पशुपालन विभाग कोटी की टीम का आभार जताते हुए कहा कि चिकित्सकों ने घर-द्वार पहुंचकर दोनों बेजुबान पशुओं का उपचार कर मानवता और पशु सेवा की मिसाल पेश की है। इस उपचार अभियान में पशुपालक सहायक ज्ञान हेटा और परिचारक सुनैना ठाकुर भी शामिल रहे।











