MBU: राजकुमार राणा की पत्नी और बेटी भगौड़े घोषित

फर्जी डिग्री मामले के आरोपी सोलन स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय (एमबीयू) ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी एवं संचालक राजकुमार राणा की पत्नी अशोनी कंवर व उसकी बेटी आईना राणा को अदालत ने भगौड़ा घोषित कर दिया है। ये दोनों भी विवि की ट्रस्टी हैं। विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने हाल ही में राणा, उसकी पत्नी और बेटे व बेटी की डिग्रियों की भी जांच की थी, जिसमें उनकी डिग्रियां भी फर्जी पाई गई थीं। उन्हें 3 जनवरी तक कोर्ट में हाजिर न होने पर सोमवार को सोलन स्थित न्यायाधीश प्रथम श्रेणी की अदालत ने दोनों को भगौड़ा घोषित कर दिया। गौर हो कि निजी विवि से लाखों फर्जी डिग्री बेचने के रैकेट की जांच स्टेट सीआईडी और हिमाचल प्रदेश पुलिस की संयुक्त एसआईटी कर रही है। वहीं, इस मामले को अब पीओ सेल के हवाले कर दिया गया है, ताकि आरोपियों की गिरफ्तारी हो सके। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी अप्रैल में होनी है।

सहायक लोक अभियोजक सिम्मी शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। राणा ने हाईकोर्ट से जमानत ले रखी है, जबकि उसकी पत्नी और बेटी फरार हैं। बताया जा रहा है कि राणा को परिवार सहित अदालत में पेश होने के आदेश दिए गए थे, लेकिन वे तय तिथि पर कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। जिस पर उन्हें भगौड़ा घोषित किया गया। सोमवार को अदालत में सीआरपीसी 82 के तहत सर्विंग कांस्टेेबल के चस्पानगी ब्यान दर्ज किए गए, जिसके बाद आगामी कार्रवाई हुई। गौर हो कि सीआईडी और पुलिस ने अब तक की जांच के आधार पर राणा की पत्नी व दोनों बच्चों के खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट हासिल कर उनके पासपोर्ट भी जब्त करा दिए हैं। फर्जी डिग्री का आरोपी यह परिवार ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है। पासपोर्ट जब्त होने के बाद अब इनके पास भारत वापस आने के अलावा कोई और रास्ता नहीं रह गया है। राणा के नाम पर दर्ज करीब 194 करोड़ रुपये की संपत्तियों को सीआईडी पहले ही ईडी से जब्त करवा चुकी है।

फर्जी डिग्री मामले के बाद मानव भारती विवि के लगभग चार हजार विद्यार्थियों की डिग्रियां लटक गई हैं। युनिवर्सिटी का तमाम रिकॉर्ड पुलिस के कब्जे में होने से यह दिक्कत पेश आ रही है। रिकॉर्ड में पूर्व और वर्तमान समय में विवि से पढ़ाई कर रहे करीब 4000 विद्यार्थी शामिल हैं। रिकॉर्ड न मिलने से विद्यार्थियों के दस्तावेजों की पहचान नहीं हो पा रही है। हालांकि विद्यार्थियों से संबंधित दस्तावेजों को बहाल करने के लिए वर्तमान विवि प्रबंधन कोर्ट में याचिका भी लगा चुका है। जिसमें कोर्ट ने विद्यार्थियों के दस्तावेज को लेकर मंजूरी दी है। वहीं अब प्रबंधन ने विद्यार्थियों के दस्तावेजों को बहाल करने के लिए एसआईटी को पत्र भेजा है।

जिसे 15 जनवरी तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 से 19 तक शिक्षा ग्रहण कर रहे पुराने विद्यार्थियों के दस्तावेज बहाल न होने के कारण वे परेशानी में हैं। दस्तावेजों की पहचान न होने के कारण विद्यार्थियों को उनकी डिग्री सहित मार्क्सशीट भी नहीं मिल रही है। जिसके चलते विद्यार्थी नौकरी सहित अन्य कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। मानव विवि में फर्जी डिग्री का खुलासा होने के बाद पुलिस ने विवि सहित विद्यार्थियों संबंधित सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए थे। इसमें वर्ष 2009 से 2019 तक रिकॉर्ड शामिल है। वहीं वर्तमान में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लग गई है।

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