तीन माह से नहीं मिला वेतन – महिला कर्मचारी कैसे मनाए त्यौहार
शिमला, 26 अगस्त। प्रदेश में मिड डे मील कर्मचारियों को पिछले तीन माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, रक्षा बंधन के अवसर पर भी अवकाश नहीं दिए जाने से मिड डे मील में कार्यरत महिला कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ गई है।
मिड डे मील कार्यकर्ता संघ ब्लॉक मशोबरा की प्रधान प्रीती ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में महिला कर्मचारियों को रक्षा बंधन, करवाचैथ और भैया दूज जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों पर विशेष अवकाश दिया जाता है, लेकिन मिड डे मील में कार्यरत महिलाओं को इन अवसरों पर भी ड्यूटी करनी पड़ती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मिड डे मील महिला कर्मचारियों को भी अन्य महिला कर्मचारियों की तर्ज पर इन त्योहारों पर विशेष अवकाश प्रदान किया जाए।
प्रीती ठाकुर ने आरोप लगाया कि मिड डे मील कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिड डे मील कर्मचारियों को मात्र 5,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो पहले ही काफी कम है। इसके बावजूद पिछले तीन माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। कई परिवारों का घरेलू खर्च इसी मानदेय पर निर्भर है, ऐसे में त्योहार के समय भुगतान न होने से कर्मचारियों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
प्रीती ठाकुर ने बताया कि लंबित मानदेय जारी करने की मांग को लेकर संघ की महिला कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली से भी मुलाकात की थी, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
संघ की अध्यक्ष ने कहा कि मिड डे मील कर्मचारियों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी डाली जा रही हैं। उनका मूल कार्य बच्चों के लिए भोजन तैयार करना और स्कूल की रसोई व्यवस्था संभालना है, लेकिन अब उनसे पानी की टंकियों की सफाई और किचन गार्डनिंग जैसे अतिरिक्त कार्य भी करवाए जा रहे हैं।
उधर, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मशोबरा नीलम ने बताया कि रक्षा बंधन के दिन स्कूल खुले रहेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के बाद महिला कर्मचारी घर जा सकती हैं।
मिड डे मील कार्यकर्ता संघ ब्लॉक मशोबरा की प्रधान प्रीती ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में महिला कर्मचारियों को रक्षा बंधन, करवाचैथ और भैया दूज जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों पर विशेष अवकाश दिया जाता है, लेकिन मिड डे मील में कार्यरत महिलाओं को इन अवसरों पर भी ड्यूटी करनी पड़ती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मिड डे मील महिला कर्मचारियों को भी अन्य महिला कर्मचारियों की तर्ज पर इन त्योहारों पर विशेष अवकाश प्रदान किया जाए।
प्रीती ठाकुर ने आरोप लगाया कि मिड डे मील कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिड डे मील कर्मचारियों को मात्र 5,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो पहले ही काफी कम है। इसके बावजूद पिछले तीन माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। कई परिवारों का घरेलू खर्च इसी मानदेय पर निर्भर है, ऐसे में त्योहार के समय भुगतान न होने से कर्मचारियों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
प्रीती ठाकुर ने बताया कि लंबित मानदेय जारी करने की मांग को लेकर संघ की महिला कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली से भी मुलाकात की थी, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
संघ की अध्यक्ष ने कहा कि मिड डे मील कर्मचारियों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी डाली जा रही हैं। उनका मूल कार्य बच्चों के लिए भोजन तैयार करना और स्कूल की रसोई व्यवस्था संभालना है, लेकिन अब उनसे पानी की टंकियों की सफाई और किचन गार्डनिंग जैसे अतिरिक्त कार्य भी करवाए जा रहे हैं।
उधर, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मशोबरा नीलम ने बताया कि रक्षा बंधन के दिन स्कूल खुले रहेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के बाद महिला कर्मचारी घर जा सकती हैं।











