वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का पावन पर्व 25 जून, गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस बार निर्जला एकादशी पर रवि योग, शिव योग, सिद्ध योग तथा स्वाति नक्षत्र का अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।
जवाली के ज्योतिषाचार्य पंडित विपन शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष पुण्यदायी माना गया है। वर्षभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन व्रती बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे वर्ष सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, वे यदि पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
पंडित विपन शर्मा के अनुसार, निर्जला एकादशी तिथि 24 जून 2026 को सायं 6 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ होगी और 25 जून 2026 को रात्रि 8 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी।
विशेष योगों का महत्व
इस वर्ष निर्जला एकादशी पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग एक साथ बन रहे हैं, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ माना जाता है। ये योग पूजा-पाठ, जप, तप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं।
इसके साथ ही स्वाति नक्षत्र का संयोग भी रहेगा, जो समृद्धि, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र में किए गए शुभ कार्य विशेष फल प्रदान करते हैं।
भद्रा का रहेगा प्रभाव
निर्जला एकादशी के दिन भद्रा का प्रभाव भी रहेगा। पंचांग के अनुसार भद्रा प्रातः 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर रात्रि 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगी। हालांकि भद्रा का निवास पाताल लोक में होने के कारण व्रत, पूजा-अर्चना और भगवान विष्णु की आराधना में किसी प्रकार की बाधा नहीं मानी जाएगी।
मिलेगा सभी एकादशियों के व्रत का पुण्य
धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए इसे मोक्षदायिनी और अत्यंत फलदायी एकादशी माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा, दान-पुण्य और व्रत करने से सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।










